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Friday, July 17, 2020

अब एक और अयोध्या विवाद



अब एक और अयोध्या विवाद


नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने दावा किया है कि भारत ने सच्चाई को तोड़ मरोड़ कर पेश किया है और राम को उत्तर प्रदेश के फैजाबाद की अयोध्या का राजा बताया है जबकि सच है किराम आज के नेपाल के किसी स्थान से आए थे। नेपाल के राष्ट्रकवि भानुभक्त आचार्य 206वीं जन्म जयंती पर आयोजित एक समारोह में ओली ने कहां की अयोध्या बिहार की सीमा बीरगंज के पश्चिमी क्षेत्र में थी। यहां यह बता देना प्रासंगिक होगा कि भानुभक्त ने बाल्मीकि रामायण का नेपाली में अनुवाद किया था। ओली ने कहा कि उत्तर प्रदेश से आकर राम ने अयोध्या में शादी की यह सही नहीं है। “ हमें सांस्कृतिक रूप में चला गया है और भारत ने वास्तविकता को तोड़ा मरोड़ा है।” ओली ने कहा कि उत्तर प्रदेश के फैजाबाद के अयोध्या का उदय बाद में हुआ और वह वास्तविक राम की राजधानी नहीं थी। उन्होंने कहा कि राम नेपाल के थे और सीता भी नेपाल की थीं। उन्होंने बारे में बताया कि बिहार की सीमा पर ठोरी एक जगह है वहीं अयोध्या थी। पुराणों में कहा गया है कि जब राम ने सीता का त्याग कर दिया तो वह अपने पुत्रों लव और कुश के साथ महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में रहती थीं। यह नारायणी( आज के गंडक) के तट पर था। यह नेपाल और बिहार की सीमा पर है और आज भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आ जाते हैं। ओली ने दावा किया कि जिन पंडितों ने राजा दशरथ के लिए पुत्रेष्टि यज्ञ कराया था नेपाल के रिदी क्षेत्र से गए थे।


नेपाल के प्रधानमंत्री का यह बयान एक ऐसे समय में आया है जब भारत और नेपाल में पहले से ही तनाव कायम है। नेपाल में कुछ लोग इस टिप्पणी का समर्थन भी कर रहे हैं और ज्यादा लोग इसका मजाक उड़ा रहे हैं। नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री बाबूराम भट्टराई ने ओली के बयान पर तंज किया और ट्वीट किया कि “ होली द्वारा रचित कल युग रामायण सुनिए और सीधे बैकुंठ की यात्रा कीजिए।” नेपाल के पूर्व उपप्रधानमंत्री कमल थापा ने कहा किसी भी प्रधानमंत्री के इस तरह का आधारहीन बयान देना उचित नहीं है। प्रधानमंत्री के इस बयान पर नेपाल के वरिष्ठ पत्रकार अमित ढकाल ने भी चुटकी ली और कहा कि “श्रीलंका काशी के पास है और वहां हनुमान नगर विजय जिसका निर्माण वानर सेना ने तब किया होगा जब वे पुल बनाने के लिए वहां एकत्र हुए होंगे।”


राजनीति और कूटनीति से ऊपर है धर्म और बड़ा ही भावनात्मक मामला है। इस तरह की बयानबाजी से शर्मिंदगी के अलावा कुछ नहीं है क्योंकि अगर अयोध्या नेपाल में है और थी तो सरयू कहां है। लगता है कि ओली भारतीय मीडिया को मसाला दे रहे हैं। इस तरह की अनर्गल बातें खास करके पौराणिक तथ्यों के बारे में कहना और कह कर खुद को विद्वान महसूस करना बड़ा हास्यास्पद है। नेपाल के प्रधानमंत्री की बात को सुनकर ऐसा लगता है कि वे भारत को उकसाने के लिए उसने कुछ करते रहना चाहते हैं। नेपाल में अभी हाल में सीमा को लेकर जो कुछ बयानबाजी की है उसे कायम कटुता अभी खत्म नहीं हुई और केपी शर्मा ओली एक नया बयान देकर कटुता को बढ़ाने की कोशिश की है। राम और अयोध्या का संबंध एक ऐसा मसला है जो सदियों से भारत में विवाद का विषय बना है और इसे लेकर कई बार खून खराबे भी हुए हैं। बड़ी मुश्किल से अदालत के हस्तक्षेप के बाद मामला है और भगवान राम का मंदिर बनने की तैयारी चल रही है। ओली के इस बयान से इस स्थिति में कटुता पैदा हो सकती है। ओली जिस पार्टी के हैं उसका नाम है नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी । नाम में ही कम्युनिस्ट लगा है और कम्युनिज्म धर्म को नहीं मानता। ओली के प्रधानमंत्री पद की शपथ ले रहे थे तो उन्होंने भगवान का नाम लेने से इनकार कर दिया था और जब भारत के प्रधानमंत्री मोदी ने जनकपुर में पूजा की थी ओली उससे अलग ही थे। आश्चर्यजनक बात यह है कि इस मौके पर जब राजनीतिक पैंतरा बदलना है तो ओली को राम की याद आ गई।


विगत कुछ महीनों से भारत और नेपाल में नक्शे को लेकर तनाव चल रहा है। नेपाल ने अपने नए नक्शे में लिपुलेख, लिंपियाधुरा और काला पानी पर दावा किया है। यह तीनों इलाके फिलहाल भारत में हैं। इस नए नक्शे के बाद दोनों देशों में तनाव बढ़ता गया। पिछले साल जम्मू कश्मीर को 2 केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद भारत ने अपना नक्शा अपडेट किया उस समय यह तीनों इलाके भारत के थे। लेकिन नेपाल में चीनी राजदूत होउ यांकी की मुलाकात के बाद तनाव बढ़ने लगा। कहा तो यह भी गया कि ओली को हनी ट्रैप में फंसा कर यह सब करवाया जा रहा है। इस पर ओली ने बहुत कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की। भारतीय मीडिया के कई चैनलों पर रोक लगा दी गई। वैसे चीन के राजदूत की नेपाल में सक्रियता को देखकर वहां के लोगों ने भी इस पर आपत्ति की है।





धीरे धीरे भारत और नेपाल में तनाव बढ़ता जा रहा है। नेपाल को अपनी सीमाएं और भारत पर आर्थिक निर्भरता के बारे में सोचना चाहिए। नेपाली अर्थव्यवस्था भारत पर बहुत कुछ टिकी है। नेपाल चुकी लैंडलॉक्ड है इसलिए वह भारतीय गोदियों को अपने व्यापार के लिए इस्तेमाल करता है और लगभग 60 लाख नेपाली भारत में काम करते हैं। नेपाल को अपनी गलतियों से सीखना चाहिए मलहम वह भारत से वार्ता के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है। सीमा विवाद एक गंभीर परिणाम हो सकते हैं भारत और नेपाल दोनों देशों को समझना चाहिए।

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