CLICK HERE FOR BLOGGER TEMPLATES AND MYSPACE LAYOUTS »

Friday, October 14, 2016

भूख के बरअक्स विकास का नारा

भूख के बरअक्स विकास का नारा

 रोज अखबारों में पढ़ कर ये ख्याल आया हमें
इस तरफ आती​ तो हम भी देखते फस्ले बहार

जी हां , सरकारी विज्ञापनों में रोज तरह तरह के नारों को अगर एक जगह जमा करेंगे तो एक लम्बी सूची बन जायेगी। यह सूची आपकी तमम कल्पनाओं को खींच कर इतना बड़ा कर देगी कि आप हकीकत और छल में फर्क करना भूल जायेंगे। मंगलवार कोग्लोबल हंगर इंडेक्स, 2016 जारी हुई है, इसमें भारत जो रैंकिंग है उसके मुताबिक स्थिति काफी गंभीर है। एशियाई देशों में सबसे ज्यादा बुरी हालत पाकिस्तान और भारत की है। 118 देशों की सूची में भारत 97वें स्थान पर है जबकि पकिस्तान 107 वें स्थान पर है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में 39 प्रतिशत बच्चे अविकसित हैं जबकी आबादी का 15.2 प्रतिशत हिस्सा कुपोषण का शिकार हैं। इस सूचकांक में भारत का स्कोर 28.5 है. जो विकासशील देशों की तुलना में काफी अधिक है। सूचकांक में विकासशील देशों का औसत स्कोर 21.3 है। भारत के दूसरे पड़ोसियों की स्थिति बेहतर है जो इस इंडेक्स में ऊपर हैं। मसलन नेपाल 72 वें नंबर है जबकि म्यांमार 75वें, श्रीलंका 84वें और बंगलादेश 90वें स्थान पर है। ये आंकड़े ऐसे समय में आए हैं जब भारत और पाकिस्तान के बीच भारी तनाव है और कुछ ही दिन पहले भाजपा के राष्ट्रीय अधिवेशन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पकिस्तान को बेरोजगारी, कुपोषण, भूख और गरीबी से जंग लड़ने की चुनौती दी थी। खैर सियासी बातों को छोड़ दें तो हकीकत यह है कि इस बार से रिपोर्ट को संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावित 2030 के एजेंडे से भी जोड़ा गया है जिसमे 'जीरो हंगर' का लक्ष्य रखा गया है।

कुछ ख्वाब हैं जो नींद में देखे नहीं जाते,

कुछ गम हैं जो चेहरे से नुमाया नहीं होते

होता है यहां रोज किसी शहर का मातम,

इस दिल की तरह दश्त भी वीरां नहीं होते

सामान्य कुपोषण, शिशुओं में भयंकर कुपोषण, बच्चों के विकास में रुकावट और बाल मृत्यु दरका आकलन कर यह आंकड़ा बनाया जाता है। इस विदेशी रपट को छोड़ भी दें तो भारत सरकार के आंकड़े बताते हैं कि भारत मे 2.3 करोड़ बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। इसी क्रम में भारत में ही 20 करोड़ से ज्यादा लोग भूखे पेट ही प्रतिदिन सो जाते हैं। कुपोषण के कारण ही भारत में लगभग 42% बच्चे अंडरवेट हैं जबकि दुनिया में कुल 92.5 करोड़ बच्चे भूख कुपोषण के शिकार हैं। सरकारी सर्वें के मुताबिक विश्व के कुपोषित बच्चों में हर तीसरा बच्चा भारत का है। अब सवाल उठता है कि केंद्र और सभी राज्य सरकारों के तमाम दावे और योजनाएं क्या केवल कागजी हैं, जिनमे बच्चों के पोषण और उनकी समुचित शिक्षा के लिए अरबो रुपये फूंक दिए जाते हैं और उसके बावजूद बच्चों के पोषण और शिक्षा की हालत बदतर है।

जो बदल सकती है इस दुनिया के मौसम का मिजाज

उस नौनिहाल पीढ़ी के चहरे की हताशा देखिये

कहते हैं  'भुभुक्षितः किम् न करोति पापम्' यानी, भूखे लोग कोई बी पाप कर सकते हैं क्योंकि भूखे भजन ना होहिं गोपाला। भूखे लोगों का देश  के विकास में योगदान नगण्य होता है।  भूख से बिलबिलाते बच्चे ही रोटी के एक टुकड़े के लिये  ढाबों,  ईंट के भट्टोऔर अमीरों के घरों में  बंधुआ मजदूरी को विवश हैं।

बेचता यूं ही नहीं है आदमी ईमान को,

भूख ले आती है ऐसे मोड पर इंसान को

ऐसे में किसी विशेष किसी एक लक्ष्य को हासिल करना विकास नहीं है। मसलन विकास के तौर पर सरकार मोबाइलों की संख्या की आंकड़े देती है, स्कूल जाने वालो बच्चों के आंकड़े देती है पर यह नहीं देखती कि कितने बच्चे ऐसा नहीं कर पा रहे हैं।  आज भी विश्व का एक बड़ा भाग मुख्य धारा से दूर है और ऐसे में किसी भी विकास की कोई अहमियत नहीं।

मजहबी दंगों के शोलों में शराफत जल गयी,

फन के दोराहे पे नंगी द्रौपदी की लाश है

0 comments: