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Sunday, November 21, 2010

राहुल के लिये संकेत


2 जी घोटाले ने अति साफ सुथरे छवि वाले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर अकर्मण्यता का लांछन लगा दिया, उसी घोटाले से एक मनोवैज्ञानिक संकेत भी सोनिया गांधी और उनके सलाहकारों के लिये मिलता हे कि वे राहुल गांधी को सत्ता के पद से दूर रखें। गांधी-नेहरू खानदान के वारिसों को सत्ता के पद से दूर रखने का यह संकेत एक बार पहले भी मिला था। बहुतों को याद होगा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के प्रथम चरण के जमाने में मीडिया में एक खबर आयी थी, जिसमें कहा गया था कि.. राजीव गांधी मौत के बाद गांधी- नेहरू परिवार की बैठक में यह तय किया गया खानदान के वारिसों को सत्ता के पदों से दूर रखा जायेगा। हालांकि वे देश की सेवा जरूर करेंगे।.. प्रधानमंत्री पद के लिये राहुल गांधी अनमयस्कता को देखकर लगता है कि वह खबर गढ़ी हुयी नहीं थी। आज जो कुछ भी हो रहा है वह कोई ऐसी घटना नहीं जो औचक हो गयी हो।
कुछ विश्लेषकों का कहना है यह राहुल गांधी ताजपोशी की पूर्व क्रिया है। लेकिन हालात को बारीकी से परखेंगे तो लगेगा कि ऐसा नहीं होने वाला। यह कोई अचानक, पलक झपकते, छीनो और भागो जैसी कार्रवाई नहीं थी। यह डी एम के का बहुत सावधानी और समझ-बूझ से बिछाया गया जाल था। उसने जिद के साथ टेलीकॉम मंत्रालय इसीलिए लिया था क्योंकि वह जानती थी कि लाइसेंसों के आवंटन में कितनी शानदार रकम छिपी हैं। प्रधानमंत्री मुश्किल में इसलिए हैं क्योंकि डी एम के लगातार पत्र लिखकर उन्हें बताती रही कि वह किस तरह नियम-कायदों को ताक पर रखकर सलाह-मशविरे या उचित प्रक्रिया का पालन किए बगैर कीमतें तय करने जा रही है।
प्रधानमंत्री की सहमति उसे अपने पत्रों की पावती के जरिये मिलती रही। इनमें सबसे महत्वपूर्ण पत्र ए राजा ने नहीं, दयानिधि मारन ने भेजा था, फरवरी 2006 में। मारन ने साफ-साफ लिखा था कि वह चाहते थे कि कीमतें तय करने का काम, यानी खजाने की चाबी, निगरानी के दायरे से बाहर हो। यह सत्ता में रहने की कीमत थी, जो डॉ सिंह और सोनिया गांधी ने चुकाई।
अगर आप इस पूरी कहानी की राजनीतिक पहेली को समझना चाहते हैं तो केवल एक सवाल का जवाब खोजिए।
वह सवाल है : मारन का यह पत्र एक टेलीविजन चैनल को किसने लीक किया? यह पत्र सरकार के भीतर से ही किसी ने लीक किया, जो डॉ सिंह को कमजोर करना चाहता था। क्यों? साफ तौर पर इसलिए कि उसे यकीन है कि कमजोर प्रधानमंत्री ज्यादा हमलों की मार सहने लायक नहीं रह जाएंगे और इसलिए शिखर की कुर्सी जल्दी ही खाली हो सकती है, चूंकि राहुल तैयार नहीं हैं, इसलिए वह अगला प्रधानमंत्री बन सकता है।