CLICK HERE FOR BLOGGER TEMPLATES AND MYSPACE LAYOUTS »

Friday, September 4, 2015

एक हाई प्रोफाइल मर्डर मिस्ट्री


2 सितम्बर 2015
इन दिनों एक मर्डर मिस्ट्री सुर्खियों में है। इलेक्ट्रानिक और अंग्रेजी मीडया तो लगता है कि इसके प्रति दीवाना हो गया है। अटकलबाजियों का ऐसा दौर चल रहा है जिसे कहा जा सकता है कि ‘लव, वार और ब्रकिंग न्यूज में हर बात जायज है।’ पिछले एक हफ्ते से देश के हर मीडिया के लिये यह प्रमुखतम खबर बन गयी है। अपनी ही बेटी के कत्ल के इल्जाम में फंसी इंद्राणी की गुत्थी अब भी बेहद उलझी हुई है। सारे तार लंदन के पैसे की दुनिया से जुड़े हुए हैं। पीटर ब्रितानी पासपोर्ट वाले हैं। इंद्राणी और उसके पूर्व पति संजीव खन्ना से पैदा हुई विधि लंदन में ही रहती है और लंदन ही वह शहर है जहां पीटर और इंद्राणी उस दौर में वक्त काट रहे थे जब उनकी कंपनी की जांच चल रही थी। लंदन से एक बड़ा पैसा रूट होकर इंद्राणी की कंपनी में लगा और इसके बाद वह धीरे-धीरे गायब होता रहा। निवेशकों ने बड़े धोखे की बात कही थी। अब यह आपराधिक मामला अदालत में जाएगा, मुकदमा चलेगा और कौन जानता है कि कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद एक और किताब आ जाएगी कि फैसले में क्या खराबी है और कैसे जज ने गलती की है। क्योंकि अविरूक सेन की किताब ‘आरूषि’ ने यही चलन स्थापित कर दिया है। इसलिए अब बहस के बिंदु अपराध क्षेत्र में नहीं हैं। इनका संबंध हम से है। एक समाज, लोकतंत्र, वित्तीय दिग्गजों के कामकाज और हमारे समाचार माध्यमों की दशा से है। इससे एक परिवार में हुई त्रासदी, फिर वह चाहे कितनी ही जटिल और चकराने वाली क्यों न हो, लतीफे की तरह नज़र आने लगी और वह पारिवारिक मनोरंजन का विषय बन गई। यह मामला हमारे समाज के बारे में क्या बताता है? हम अपने टीवी पर ऐसी सस्ती चीजें देखना पसंद करते हैं, लेकिन इस पर नाक-भौं भी सिकोड़ते हैं और जो पत्रकार हमारे लिए ये लाते हैं उनका मजाक उड़ाते हैं। ‘ऑनर किलिंग’ भी हमें विचलित नहीं करते, क्योंकि यह तो गरीब, ज़ाहिल, गांव वाले अपने बच्चों के साथ करते हैं। लेकिन हमारे जैसे लोग? नहीं, नहीं। यही वजह है कि आरूषि के पालकों ने कभी अपनी बच्ची को नहीं मारा होगा, फिर अदालत चाहे जो कहे। केवल हरियाणा व पश्चिमी उत्तरप्रदेश के जाट ‘सम्मान’ के लिए अपनी बेटियों की हत्या करते हैं। और इंद्राणी ने ऐसा किया है तो शायद इसलिए कि वे आकर्षक, लालची, सत्ता की भूखी, छोटे शहर की ऐसी लड़की है, जिसकी महत्वाकांक्षाएं बहुत ज्यादा हैं। बेशक कुछ हकीकतें होतीं हैं और कुछ कहानियां थोड़े से रहस्य। वे रहस्य और कहानियां इतनी बार दोहरायी जातीं हैं कि हम उन्हें सच समझने की धारणा पाल लेते हैं। यही सच इंद्राणी मामले में है कि यह एक हाई सोसाइटी मर्डर केस है। इंद्राणी के इंद्रजाल में से हर पल नई कहानियां नुमाया हो रही हैं। हर कहानी रस में डूबी, हमारी हर ‘इंद्रिय’ को मदहोश कर देने वाली, दिल से दिमाग़ तक न जाने कितने तारों को झनझना देने वाली। और हमारी हर मांग की पूर्ति को अपना परम कर्तव्य समझने वाली टीवी की ख़बरिया दुनिया हमें बता रही है कि अब इंद्राणी ने सैंडविच खाया, अब उसने कुल्ला किया, क़त्ल के वक़्त शीना गर्भवती थी: सूत्र और उसके कुछ घंटे बाद- देखा, हमारी बात सही निकली, वह वाक़ई गर्भवती थी। बस यह नहीं बता रही कि सैंडविच ग्रिल्ड था या चिकन। बार-बार घूम फिरकर कत्ल का राज पैसे के लेन-देन पर ही आकर अटक रहा है। इंद्राणी ने सबसे पहले पैसे का लालच अपने पूर्व पति संजीव खन्ना को दिया। संजीव को इंद्राणी ने बीते कुछ वक्त में मोटा पैसा दिया था। इस लेन-देन के सबूत पुलिस के पास हैं। इंद्राणी ने पैसे से ही अपने ड्राइवर की वफादारी खरीदी। एक बड़ा सवाल उठ रहा है कि वह चौथा शख्स कौन था, जिसे हत्या की पूरी हकीकत मालूम थी ? जाहिर सी बात है ड्राइवर और संजीव खन्ना तो हो नहीं सकते क्योंकि दोनों शामिल थे और दोनों को लगातार पैसा मिल रहा था। इंद्राणी का सवाल ही नहीं उठता। राहुल मुखर्जी तो अपनी जिंदगी में शीना की फाइल ही बंद कर चुका था। इस बात के भी पर्याप्त सबूत हैं कि उसने यह जानना बंद कर दिया था कि शीना कहां और कैसे गायब हो गई। तो फिर चौथा आदमी कौन था ? यह वही शख्स है जिसने पुलिस को पहली सूचना दी। कहीं लिव इन रिलेशनशिप वाला एस दास तो नहीं।पुलिस जिस केस की जांच अभी-अभी दिखा रही है दरअसल उस पर पिछले तीन महीने से काम हो रहा था। बहुत सारे सबूत गिरफ्तारियों से पहले ही जुटा लिए गए हैं। ऐसे में सवाल यह भी है कि उस चौथे आदमी का क्या फायदा हो सकता था इस राज को खोलने से ? क्या पूरा केस इसलिए खुला क्योंकि कहीं पैसे के लेन-देन का कोई एक बड़ा पेंच अटक गया था ? क्या इंद्राणी कुछ पैसा देने से इंकार कर रही थी जिसके चलते यह पूरी फाइल खोल दी गई ? पुलिस की कहानियां कहती हैं कि उसे किसी अंजान शख्स ने यह सारी जानकारी दी और वह केस को फॉलो करती चली गई। जब भी ऐसे मामले होते हैं तो मीडिया तथा हमारा समाज लगातार यही कहता है कि हाई सोसाइटी में ऐसा कैसे हुआ, ऐसा नहीं होना चाहिये। इस दशा में हमें यह समझना होगा कि जब किसी कमजोर क्षण में व्यक्ति अपराध करता है तो हर ऐसा व्यक्ति(अपराधी) समान होता है : डरा हुआ, लालची, कमजोर, मूर्ख, घटिया, जातिहीन और दोषी। अपराध की गंभीरता कम करने वाले कोई तथ्य नहीं होते।एच जी वेल्स ने लिखा है कि हर अपराध अंत में समाज के प्रति अपराध होता है।

0 comments: