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Friday, June 24, 2011

बदलती सामाजिक व्यवस्था के संकेत हैं ये कुकर्म


हरिराम पाणेय
21.6.2011
भारत एक ऐसा देश है जहां नारी की पूजा करने का प्रावधान है। किशोरी पूजन से लेकर मां तक नारी के कई पूजनीय स्वरूप हमारे वांगमयों में वर्णित हैं। यही नहीं जिस देश की राष्टï्रपति और तीनों सेना की सर्वोच्च कमांडर नारी हैं उसी देश के एक सबसे उन्नत कहे जाने वाले राज्य -उत्तर प्रदेश जो राम और कृष्ण दोनों की जन्म स्थली है- में पिछले तीन दिनों में एक किशोरी के साथ बलात्कार कर उसकी आंखें फोड़ डाली गयीं, दूसरी लड़की का अपहरण कर उससे सामूहिक बलात्कार किया गया, तीसरी लड़की का बलात्कार कर हत्या कर दी गयी और लाश को फेंक दिया गया जो तीन दिनों के बाद बरामद हुई, चौथी महिला को उसके घर में बलात्कार कर जला दिया गया। ये घटनाएं उस प्रदेश में हो रहीं हैं जिसकी मुख्यमंत्री महिला हैं। दुखद बात तो यह है कि इन अपराधों से निपटने के बजाय सरकार इसे सियासी रंग देकर स्थिति का रुख बदल देना चाहती है।
वैसे यह स्थिति केवल उत्तर प्रदेश की नहीं है। इन दिनों लगभग हर रोज अखबारों में तथा टीवी चैनलों में खबर होती है रेप की। वह अपराध करने वाले कोई भयंकर अपराधी नहीं किशोर लड़के पाये जाते हैं। यह अचानक सामाजिक परिवर्तन हमारे देश की बिगड़ती सामाजिक स्थिति का संकेत है। राष्टï्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के गत वर्ष के आकड़ों के अनुसार पूरे देश में महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक पूरे देश में दर्ज होने वाले बलात्कार के मामलों में से एक चौथाई दिल्ली में घटित होते हैं। रिपोर्ट के अनुसार आलोच्य वर्ष में महिलाओं के खिलाफ आपराधिक मामले 4.1 फीसदी बढ़े। महिलाओं के खिलाफ आपराधिक मामलों में बलात्कार, अपहरण, दहेज सम्बंधित हत्याएं, प्रताडऩा, छेड़छाड़, यौन उत्पीडऩ, मानव तस्करी और अभद्र व्यवहार शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार देश भर में महिलाओं के प्रति होने वाले अपराध की भयावह तस्वीर पेश करते हैं। देश में हर तीन मिनट पर एक महिला अपराध की शिकार हो रही है। हर 29 मिनट में किसी न किसी महिला के साथ बलात्कार हो रहा है। महिलाओं के साथ होने वाले बलात्कार के मामले में भारत दुनिया के तीन देशों में शामिल है। सबसे अधिक बलात्कार के मामले अमरीका में दर्ज किए गए हैं, जहां ऐसे 93,934 मामले सामने आए हैं। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका (54,926) और भारत (18,359) का स्थान आता है।
पिछले दिनों जिस तेजी से समाज में बलात्कार की घटनाएं बढ़ी हैं वो न सिर्फ एक सभ्य समाज के नाम पर कलंक की तरह हैं बल्कि खुद को स्थापित करते महिला जगत के लिए एक गंभीर खतरा है। दुख की बात ये है कि इस अपराध का संबंध न तो अशिक्षा से है न मजबूरी से। एक और आश्चर्य की बात ये है कि ये अपराध जितना अधिक विकासशील और पिछड़े देशों में हो रहा है लगभग वही प्रतिशत विकसित और आधुनिक कहलाने वाले देशों में भी है, किंतु भारत के महानगरीय जीवन विशेषकर दिल्ली -मुंबई जैसे शहरों में तो अब ये एक नियति सी बन चुकी है। भारतीय कानून संहिता में बलात्कार शब्द की बहुत विस्तृत व्याख्या की गई है। समाजशास्त्री मानते हैं कि इस घृणित अपराध को कम करने के लिए सजा से उसके ऊपर नियंत्रण पाने के साथ ही जरूरी है कि सरकार इसके कारणों को समझते हुए इसे कम करने के प्रयासों की ओर ध्यान दे। महिलाओं को आत्मसुरक्षा का प्रशिक्षण, छोटे अवयस्क बच्चों में यौनिक सजगता एवं सचेतना और बलात्कारियों के मनोविज्ञान का अध्ययन करके उन कारणों की तह तक पहुंच कर उसे दूर करने जैसे उपायों पर काम करना चाहिए। अब समय आ गया है कि सरकार , समाज , पुलिस, कानून, अदालत सब संगठित होकर इस अपराध के खिलाफ एक रणनीति बनाएं और इसे खत्म करने का प्रयास करें।

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