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Friday, October 11, 2019

पाकिस्तान अपने किरदार से परेशान है

पाकिस्तान अपने किरदार से परेशान है 

अभी हाल में आई एक रपट के मुताबिक पाकिस्तान के 66% लोगों का मानना है कि भारत के साथ कभी भी जंग हो सकती है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि सर्वे करने वाली संस्था गैलप के अनुसार अधिकांश पाकिस्तानियों का मानना है कि भारत से कभी भी जंग हो सकती है और उस जंग में परमाणु हथियारों का इस्तेमाल हो सकता है। अगर ऐसा हुआ तो बहुत बड़ी संख्या में लोग मारे जा सकते हैं। गैलप के सर्वे में पाकिस्तान की उच्च और मध्यम वर्ग के लोगों ने हिस्सा लिया था। हालांकि इस सर्वे में यह नहीं बताया गया है कि कितने लोगों को इसमें  शामिल किया गया था। यहां ध्यान देने की बात है कि  कश्मीर को दिए गए विशेष दर्जे को भारत द्वारा वापस लिए जाने के बाद पाकिस्तान में बेचैनी बढ़ गई है।  यही कारण है क्यों वहां के नेताओं की तरफ से युद्ध की आशंका बार-बार प्रगट की जा रही है। आशंका प्रगट करने वालों में खुद प्रधानमंत्री इमरान खान और रेल मंत्री शेख राशिद भी शामिल हैं। शेख राशिद ने तो यहां तक कह दिया था अक्टूबर-नवंबर जंग हो जाएगी । युद्ध पिपासु पाकिस्तान की जनता  का यह विचार केवल इस लिए है कि वहां आम जनता में बेचैनी है ,भारी परेशानी है। पाकिस्तानी मनोवैज्ञानिकों के अनुसार वहां अवसाद और परेशानी की समस्या दुनिया के किसी भी देश से चार या पांच  गुना ज्यादा है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार पाकिस्तान में 30 साल से कम आयु के अविवाहित युवाओं में और 30 साल से ज्यादा उम्र की विवाहित महिलाओं में आत्महत्या की प्रवृति  लगातार बढ़ती जा रही है ।  अखबारों में प्रकाशित इस रपट के अनुसार देश में जितनी आत्महत्या के सरकारी आंकड़े हैं उससे कहीं ज्यादा ऐसे भी मामले हैं जिनका सरकार के पास कोई डाटा नहीं है। जिन्ना पोस्टग्रेजुएट मेडिकल सेंटर के मनो चिकित्सकों के अनुसार पाकिस्तान में करीब 33% लोग अवसाद और बेचैनी से ग्रस्त हैं। कुछ इलाकों में तो हालात और खराब हैं। इनमें पाकिस्तान का उत्तरी क्षेत्र शामिल है । इन लोगों के पास न करने लिए कुछ है और ना सोचने के लिए तथा डिप्रेशन के जुनून में ये सिर्फ भारत से जंग चाहते हैं। मनो चिकित्सकों के अनुसार डिप्रेशन खुदकुशी या इस तरह के विचारों का मुख्य कारण है। पाकिस्तान की सबसे बड़ी ट्रेजेडी  है वहां विकास के नाम पर न आर्थिक विकास हुआ और ना ही सामाजिक विकास।  सेना तथा सियासत के बीच गठबंधन के कारण लगातार समाज  की उपेक्षा होती रही है। यही उपेक्षा अवसाद में परिवर्तित हो गई। जिन समाजों में उद्देश्य हीनता और जीवन मूल्यों के प्रति अनिश्चय की स्थिति ज्यादा होती है वहां व्यक्तिगत स्तर पर अवसाद बढ़ता है इसलिए सामाजिक संबंधों को सुधारने के साथ-साथ समाज और विशेषकर नौजवानों में सार्थक उद्देश्य और नैतिक मूल्यों की व्यापक सहमति होनी चाहिए। पाकिस्तान में सार्थक उद्देश्य और नैतिक मूल्यों की व्यापक सहमति का भारी अभाव है इसलिए वहां कुछ कर गुजरने और यूफोरिया में जीने के लिए नौजवानों में एक तरफ नशा और दूसरी तरफ आतंकवाद को अपनाने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है । यह  प्रवृत्ति  ना केवल पड़ोसी देशों के लिए  खतरनाक है  बल्कि आत्मघाती भी है। यही कारण है के रावलपिंडी से लेकर राष्ट्र संघ तक पाकिस्तानी हुक्मरान बम और जंग की बात करते नजर आते हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जब जापान पर परमाणु बम गिराया गया था तो विख्यात दार्शनिक बट्रेंड रसैल ने अपने स्मरणीय भाषण में कहा था कि "जापान पर बम गिराया जाना रणनीतिक नहीं है बल्कि डिप्रेशन का प्रभाव है और आने वाले दिनों में ऐसा कई जगह देखने को मिल सकता है। क्योंकि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अर्थव्यवस्था लगभग चरमरा गई है और विकास के रास्ते नजर नहीं आ रहे थे । ऐसे में आम जनता के पास खुश होने के लिए बदला लेने और दुश्मन को मार डालने के अलावा कोई विकल्प नहीं था । " जहां तक पाकिस्तान का प्रश्न है तो वहां की आबादी ने कुछ ऐसे लोगों की बहुलता है जिनमें जंग ,हिंसा तथा दमन की प्रवृत्ति जेनेटिक है । ऐसे लोग मोह ,माया, नफासत और विकास की बात कम तथा हिंसा की बात ज्यादा सोचते हैं। यही कारण था कि बंटवारे के समय लाखों लोगों की लाशें उस पार से आई थी। आज ऐसे ही एहसास से पाकिस्तान के वजूद को खतरा पैदा हो रहा है । अगर वहां के नेता तथा समाज के अगुआ लोग अभी नहीं चेते तो बहुत देर हो जाएगी।

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