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Thursday, December 15, 2016

व्यंग्य : अतिथिपूजक भारत में टाइप -टाइप के गेस्ट

व्यंग्य : अतिथिपूजक भारत में टाइप-टाइप गेस्ट
हमारा देश अतिथि को देवता मानता है –अतिथि देवो भव। वैसे यह बी कहा जाता है कि अतिथि कब जाओगे। कुछ लोग यह भी कहते हैं कि अतिथि यानी जिसके आने ओर जाने की कोई तिथि ना हो। लेकिन हम इस भारतीय संस्कृति सभ्यता से अलग आज के युग के गेस्ट से मुखातिब हैं। आज का गेस्ट एक दम सही तारिख पर आता है। उनकी कई प्रजातियां भी हैं। हालांकि उन गेस्ट्स से आप भी जनमदिन की पार्टी से लेकर कई फंक्शन में गेस्टों से दो चार होते होंगे लेकिन उनके बारे में जानकारी कम होगी। भांति भांति के गेस्ट होते हैं। जैसे एक होते हैं गुमशुदा गेस्ट। ये अजीब प्रकार के जीव हैं आपकी पार्टी में अभी दिखेंगे और अभी अंतर्धान हो जायेंगे। मोबाइल वहीं छोड़ जायेंगे। अब आप उनहें ढूंढिये मोबाइल लौटाने के लिये। पता चलेगा कि वे किसी र्दसरी पार्टी को तिर्थ कर रहे हैं। 

एक होते हैं जगह जुगाड़ू गेस्ट। ये हर पार्टी में बेस्ट प्लेस की फिराक में रहते हैं और वहां अपनी प्लेट या रुमाल रख देंगे जिससे पता चले कि इस पर कोई है और दूसरा जगह जुगाड़ू ना उसे हथियाह ले। 

एक होते हैं गपास्टी गेस्ट। ये लोग सदा गपास्टक में लगे रहते हैं। गपास्टक का अर्थ आपको मालूम है। गपास्टक एक तरह से गपगुल्म है। जैसे बुके में कई तरह के फूल एक साथ बंधे होते हैं उसी तरह से कई तरह के गप एक साथ मिले होते हैं उसे गपास्टक कहते हैं। गपास्टक के आठ अंग होते हैं। जैसे व्यर्थ , अनर्थ, निंदा, मिथ्या, अटकल, आकलन, आतमप्रशंसा और मक्खनबाजी। इसके दौरान हस्त संचालन , कायावेष्ठन और नैन मटक्का खास किस्म के संचारी भाव का सृजन करते हैं। जो इन तीनों चष्टाओं में जितना पारंगत होता है वह उतना ही गपास्टी होता है। 

एक होते हैं शादी लाल जो हर पार्टी में जोड़े ही मिलाते रहते हैं। कुआरे जोड़े को मिला कर कहेंगे सोना में सुगंदा आ जायेगा और शादी शुदा जोड़े पर मुंह बिचका के कहेंगे हूर के पल्लू में लंगूर बांदा दिया है। इनके पास सभी कुवांरे कुवांरियों की जबानी फेहरिस्त होती है। 

एक सरौता टाइप गेस्ट होते हैं जो हर चीज की आलोचना करते सुने जायेंगे। चाहे वह किसी की ड्रेस हो या खाना या पीना। हर चीज पर नाक भौं सिकोड़ेंगे। सरोता टाइप गेस्ट का एक और भेद है उबाऊ। उनकी बात से हर ऐरा गैरा ऊब जाता है पर औपचारिकता है कि कुछ बोलता नहीं। 

एक चापलूस प्रकार के गेस्ट होते हैं। ये सार्वजनिक जीवन में चमचों के समकक्ष होते हैं। लेकिन उनहें वो रुतबा हासिल नहीं है जो चमचों को है। चापलूस किस्म के गेस्ट पार्टी में किसी बी चीज की यहां तक के ​कि किसी के वायु विमोचन की प्रशंसा करते पाये जाते हें। ये हानिकारक सामाजिक जीव नहीं हैं। 

एक हंसोड़ टाइप होते हैं जो हर बात का मजाक उड़ाते हैं, लतीफे सुनाते हैं, दूसरों का मजाक बनाते हैं। खाऊवीरों से तो आपका साबका पड़ा ही होगा जो खाकर आपका पसीना छुड़ा देंग। एक होते हैं निंदक गेस्ट जो हरदम निंदा ही करते रहते हैं। इनके अलावा सेवाकारी , सलाहकार और दोराया यानी दो तरह की राय देने वाले गेस्ट होते हैं जो हानिकारक कम होते हैं। वैसे और भी कई तरह के गेस्ट होते हैं पर मैक्रो लेवल पर चर्चा करने से क्या लाभ।

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